डिप्टी कमिश्नर पद से इस्तीफा देने की तदबीर नौकरी बचाने की चाल तो नहीं!
लखनऊ। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के बयानों से उपजे विवाद के बीच योगी के नाम पर अपनी सरकारी नौकरी से इस्तीफा देने की तदबीर करने वाले राज्य कर विभाग के अयोध्या में तैनात डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह विवादों में घिरे दिख रहे हैं। उनके एक बेहद विवादित मामले के सामने आने के बाद यह चर्चा उठ रही है कि अपनी नौकरी फंसी देखकर उन्होंने मौके का फायदा उठाने और सहानभूति हासिल करने की सोच के साथ इस्तीफा देने की चाल तो नहीं चली है।
फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र से हासिल की है नौकरी
प्रशांत कुमार सिंह पर सबसे गंभीर आरोप उनके सगे भाई विश्वजीत सिंह ने लगाया है। विश्वजीत सिंह का आरोप लगाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। भाई विश्वजीत का आरोप है कि प्रशांत ने फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र लगाकर राज्य कर विभाग में नौकरी हासिल की है।
बताया जा रहा है कि इस मामले की जांच भी चल रही है। इसी मामले में मऊ के सीएमओ का कहना है कि प्रशांत कुमार सिंह को दिव्यांगता की जांच और दस्तावेज का सत्यापन 28 नवंबर 2025 तक कराने के लिए कहा गया था लेकिन अभी तक उन्होंने इस संबंध में कोई जवाब नहीं दिया है।
यह भी बताया जा रहा है कि प्रशांत कुमार सिंह राजनीति में जाने की इच्छा रखते थे। उन्होंने एक समय अमर सिंह की पार्टी भी ज्वाइन की थी। यह नौकरी में आने से पहले का मामला है। राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखने वाले प्रशांत के नौकरी में विवाद में फंसने की वजह से भविष्य की यह योजना उस तरीके से आकार नहीं ले पा रही है। अभी तो सबसे बड़ी चुनौती उन्हें अपनी नौकरी बचाने की है। जिसके लिए वहां हर हथकंडा अपनाते दिख रहे हैं।

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