संभल सीजेएम तबादले मामले को लेकर कांग्रेस हमलावर

  • कांग्रेस पार्टी ने लगाया आरोप, भारतीय जनता पार्टी सरकार न्यायपालिका पर कब्जा करने की कोशिश कर रही
  • तबादले पर बोले खेड़ा, भाजपा सरकार के एजेंडे के खिलाफ जाने वाले जज का कर दिया जाता है तबादला या डिमोशन 
  • यह गुजरात में आजमाया-परखा मॉडल, जिसमें जजों के तबादले कराकर मनचाहे फैसले हासिल किए जाते हैं: खेड़ा

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के संभल जिले के सीजेएम विभांशु सुधीर के तबादला मामले में आरोप लगाते हुए कांग्रेस पार्टी ने इसे भाजपा सरकार द्वारा न्यायपालिका में हस्तक्षेप करार दिया है। पार्टी ने कहा कि भाजपा सरकार न्यायपालिका को डराने और उस पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है। हाल यह है कि जज का फैसला पसंद नहीं आने पर उनका तुरंत तबादला या डिमोशन कर दिया जाता है।  

कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए शनिवार को पार्टी के मीडिया व पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन एवं पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने एक पुराना वीडियो दिखाते हुए दावा किया कि गुजरात में एक आरोपी को बार-बार जज बदलवाकर उसे राहत दिलवाई गई थी। पवन खेड़ा ने कहा कि यह गुजरात में आजमाया और परखा हुआ मॉडल है, जिसमें जजों के तबादले कराकर मनचाहे फैसले हासिल किए जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अब इसी मॉडल को उत्तर प्रदेश में इस्तेमाल किया जा रहा है।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि नवंबर 2024 में संभल में हुई हिंसा के मामले में सीजेएम विभांशु सुधीर ने तत्कालीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके तुरंत बाद जज विभांशु सुधीर को डिमोशन कर सुल्तानपुर भेज दिया गया। खेड़ा ने इसे दंडात्मक कार्रवाई और न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश करार दिया।

वकीलों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया

सीजेएम विभांशु सुधीर के समर्थन में चंदौसी कोर्ट में वकीलों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हुए पवन खेड़ा ने कहा कि वकील समुदाय हमेशा से लोकतंत्र की रक्षा में अग्रणी भूमिका निभाता रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री निशाना साधते हुए कहा कि इस तरह का हस्तक्षेप लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है, जिससे आम आदमी का अदालतों पर से भरोसा उठ जाएगा। 

कांग्रेस नेता ने दिल्ली दंगों के दौरान एफआईआर का आदेश देने वाले जस्टिस मुरलीधर और गौतम अडानी पर जुर्माना लगाने वाले राजस्थान के जज दिनेश कुमार गुप्ता के तबादलों का हवाला देते हुए कहा कि जब भी कोई जज सत्ता के करीबी नेताओं या बड़े उद्योगपतियों के खिलाफ फैसला देता है, तो उसे दंडित किया जाता है। उन्होंने गुजरात के डीजी वंजारा, माया कोडनानी जैसे तमाम आरोपियों से संबंधित केस का भी जिक्र किया।

शंकराचार्य का भी मुद्दा उठाया

पवन खेड़ा ने प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ दुर्व्यवहार का मुद्दा भी उठाते हुए कहा कि यह कोई एकल घटना नहीं है, बल्कि सरकार की कार्यशैली का प्रतीक है। 

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