सिद्धू ने सरेंडर किया, पटियाला की जेल में काटेंगे सजा
नई दिल्ली। पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने शुक्रवार को पटियाला की एक कोर्ट में सरेंडर कर दिया। इससे पहले वह सुप्रीम कोर्ट गए थे, पर उन्हें वहां से राहत नहीं मिली। सरेंडर करने के बाद सबसे पहले कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू को मेडिकल जांच के लिए ले जाया गया। उन्हें पटियाला जेल में रखा जाएगा। सिद्धू को सन 1988 के ‘रोड रेज’ के एक मामले में एक साल कैद की सजा सुनाई गई है।
कांग्रेस नेता 20 मई को दिन में इस मामले में अपनी सेहत की स्थिति को लेकर सरेंडर करने के वास्ते कुछ हफ्तों की मोहलत देने का अनुरोध करने के साथ सुप्रीम कोर्ट गए थे। सिद्धू की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला की पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया और कहा कि पूर्व क्रिकेटर को आत्मसमर्पण के लिए कुछ हफ्तों का समय चाहिए। उन्होंने पीठ से कहा कि निश्चित तौर पर वह जल्द ही सरेंडर करेंगे। यह फैसला 34 साल बाद आया है। वह अपने चिकित्सीय मामलों को सुव्यवस्थित करना चाहते हैं।
इस पर पीठ ने सिंघवी से कहा कि मामले में फैसला एक विशेष पीठ ने दिया है। पीठ ने कहा कि आप यह अर्जी प्रधान न्यायाधीश के समक्ष दाखिल कर सकते हैं। अगर प्रधान न्यायाधीश आज पीठ का गठन करते हैं तो हम इस पर विचार करेंगे। अगर पीठ उपलब्ध नहीं है तो इसका गठन किया जाएगा। उस रोड रेज मामले के लिए एक विशेष पीठ का गठन किया गया था। शीर्ष अदालत ने कहा कि एक औपचारिक अर्जी उचित पीठ के समक्ष दाखिल करनी होगी। इस पर सिंघवी ने कहा कि वह मामले का उल्लेख प्रधान न्यायाधीश के समक्ष पेश करने की कोशिश करेंगे।
शीर्ष अदालत ने मई 2018 में सिद्धू को 65 वर्षीय व्यक्ति को जानबूझकर चोट पहुंचाने के अपराध का दोषी ठहराया था लेकिन उन्हें केवल 1,000 रुपये का जुर्माना लगाकर छोड़ दिया गया था। शीर्ष अदालत ने 19 मई को फैसला सुनाते हुए कहा था कि संबंधित परिस्थितियों में भले ही आपा खो गया हो, लेकिन आपा खोने का परिणाम तो भुगतना होगा।

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