सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी मामले की सुनवाई वाराणसी के जिला न्यायालय को दी, कहा-प्राथमिकता के आधार पर फैसला लें
नई दिल्ली/प्रयागराज। सुप्रीम कोर्ट ने काशी के ज्ञानवापी मस्जिद प्रकरण के दीवानी वाद को वाराणसी के जिला न्यायालय को स्थानांतरित कर दिया है। जिला न्यायालय को इस मामले में प्राथमिकता के आधार पर फैसला लेने को कहा है। शीर्ष अदालत ज्ञानवापी मस्जिद समिति की याचिका पर आगे की सुनवाई जुलाई में करेगी।
शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को ज्ञानवापी मस्जिद मामले में राखी सिंह व अन्य चार महिला श्रद्धालुओं द्वारा दायर दीवानी वाद की सुनवाई वाराणसी के दीवानी न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) के पास से जिला न्यायाधीश वाराणसी को स्थानांतरित करते हुए इस मामले में प्राथमिकता के आधार पर फैसला लेने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने जिला न्यायाधीश से कहा कि वाराणसी की अदालत दस्तावेजों के हस्तांतरण को लेकर हिंदू भक्तों द्वारा दायर दीवानी वाद पर पहले सुनवाई करेगी।
शीर्ष अदालत ने यह भी कहा है कि इस मामले में ‘शिवलिंग’ क्षेत्र की सुरक्षा और मुसलमानों को नमाज अदा करने की अनुमति से संबंधित पहले के निर्देश लागू रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने वाराणसी के जिलाधिकारी को ज्ञानवापी मस्जिद में नमाज अदा करने वाले मुसलमानों के लिए वजू की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट अब 06 जुलाई को सुनवाई करेगी
वहीं दूसरी तरफ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 20 मई को काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद मामले में सुनवाई छह जुलाई तक के लिए टाल दी है। वाराणसी के अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद और अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति प्रकाश पांडिया ने सुनवाई की अगली तारीख 06 जुलाई तय की।
इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में मूल वाद वर्ष 1991 में वाराणसी की जिला अदालत में दायर किया गया था। जिसमें वाराणसी में जहां ज्ञानवापी मस्जिद मौजूद है, वहां प्राचीन मंदिर बहाल करने की मांग की गई थी। वाराणसी की अदालत ने 08 अप्रैल 2021 को 05 सदस्यीय समिति गठित कर सदियों पुरानी ज्ञानवापी मस्जिद का समग्र भौतिक सर्वेक्षण कराने का आदेश दिया था।
याचिकाकर्ताओं ने 08 अप्रैल के इस आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में यह कहते हुए चुनौती दी कि वाराणसी की अदालत का यह आदेश अवैध और उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर का है। याचिका में कहा गया कि वाराणसी की अदालत में यह विवाद सुनवाई योग्य है या नहीं, यह इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है।

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